ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध
विष्णु नागर की कवितायें
कुँए में मेंढक
यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता -भाग 2
स्मृतिशेष अनुराधा मंडल की कवितायें .
यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता
सविता सिंह की कवितायें
माया अंजेलो की कवितायें
अपर्णा अनेकवर्णा की कवितायें
स्त्री सुन्दरता के नये पैमाने : आत्ममुग्धता से आत्मकुंठा तक