ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध
उर्फ़ी जावेद का साहित्य कनेक्शन
एक खुली क़िताब जिसे पढ़ना बाकी है
मीरा का काव्य और स्त्री अस्मिता का प्रश्न
आलोक आज़ाद की ‘ईश्वर के बच्चे’ और अन्य कविताएं
‘कुतों के रूपक’ में इंसानियत का प्रतिबिम्ब
गुंजन उपाध्याय पाठक की पाँच कविताएँ
प्रश्नचिह्न
जगजीवनराम के बारे में कई भ्रांतियां तोड़ती है यह किताब
स्त्री सुन्दरता के नये पैमाने : आत्ममुग्धता से आत्मकुंठा तक