लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
राजेंद्र यादव से मन्नू का प्रेम ठोस था: वे पत्नी और प्रेमिका दोनो रहीं
मैत्रेयी इतनी इर्ष्यालू थी कि वह नजर रखती थी कि राजेंद्र जी के पास कौन आ रहा है (?)
21वीं सदी: स्त्री-सम्वेदी पुरुष की परिकल्पना और ‘कठपुतलियाँ’
मन्नू भंडारी के नाम
केजरीवाल सर, हिन्दी अकादमी में आपकी उपाध्यक्ष साहित्यिक झूठ खड़ा कर रही हैं? (मन्नू-मीता-मैत्रेयी के सच की खोज)
स्त्री विमर्श और ‘कठगुलाब’
स्त्रीवाद और महादेवी की ‘श्रृंखला’ की कड़ियाँ’
एक बम तो मैं भी फोङूँगी ही
सूखा नशा