लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
संध्या नवोदिता की कवितायें : जिस्म ही नहीं हूँ मैं और अन्य
सवाल-दर सवाल स्त्री की चिंता (रेखा कस्तवार की किताब ‘किरदार ज़िंदा है’)
स्त्री के लिए एकांत, आज अभी भी ‘लक्जरी’ माना जाता है
रविकांत की कविताएं : तलाक दी गयी औरेतें और अन्य
स्त्री आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति की कविताएं
औरतों की ईद …
निर्मला पुतुल की कविताएँ: आदिवासी पीड़ा और प्रतिरोध का काव्य-संसार
राष्ट्रवाद का सीमांतः हिन्दी साहित्य के इतिहास-लेखन में सहजोबाई और भक्तिकाल
सूखा नशा