स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
सुर बंजारन
इस्मत आपा को पढ़ते हुए
यक्ष-प्रश्न और अन्य कविताएँ
संध्या नवोदिता की कवितायें : जिस्म ही नहीं हूँ मैं और अन्य
सवाल-दर सवाल स्त्री की चिंता (रेखा कस्तवार की किताब ‘किरदार ज़िंदा है’)
स्त्री के लिए एकांत, आज अभी भी ‘लक्जरी’ माना जाता है
रविकांत की कविताएं : तलाक दी गयी औरेतें और अन्य
‘गूज बम्प्स’