स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
पिंजरे की तीलियों से बाहर आती मैना की कुहुक
राष्ट्रवाद, विश्वविद्यालय और टैंक: संदीप मील की कहानी
बेड़ियाँ: अरविंद जैन की कहानी
क्रूर और हिंसक यथार्थ में प्रेम और करुणा को बचाये रखने की कोशिश है समकालीन स्त्री- कविता
भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है
मुन्नी गुप्ता की कविताएं ( प्रेतछाया और रोटी का सवाल व अन्य)
तीस घटा पाँच बराबर आज़ाद और मुकद्दस औरत (पतनशील पत्नियों के नोट्स से)
सत्यप्रकाश की कविताएं (शब्द व अन्य)
‘गूज बम्प्स’