स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
आम्रपाली ( रेनू यादव की कविताएं)
मध्यवर्गीय कामकाजी स्त्रियों के कशमकश भरी जिंदगी की कविताएं !
आज का स्त्रीलेखन सहज और ज्यादा आत्मविश्वासी है
वर्जिन : जयप्रकाश कर्दम की कहानी (आख़िरी क़िस्त)
मेरी माँ मेरा आदर्श..!
वर्जिन : जयप्रकाश कर्दम की कहानी (पहली क़िस्त)
वेश्यालय में किस्म-किस्म के लोग आते हैं: विदुषी पतिता की आत्मकथा
स्त्री यौनिकता से भयभीत हिन्दी आलोचना और ‘उर्वशी’
‘गूज बम्प्स’