दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
कार्बाइड का कलंक : औरतों की आपबीतियां
कार्बाइड का कलंक
स्त्री -पुरुष समानता के अग्रदूत डा.आम्बेडकर
महज मुद्दा
बिहार के भागलपुर में बलात्कार की कोशिश : जेंडर और जाति के समुच्चय का घिनौना चेहरा
रक्त शुद्धता, स्त्री दासता और लव जेहाद
कम से कम एक दरवाज़ा
इतिहास का अंधकूप बनाम बंद गलियों का रूह -चुह : गया में यौनकर्म और यौनकर्मी : अंतिम क़िस्त
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना