रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
कम से कम एक दरवाज़ा
इतिहास का अंधकूप बनाम बंद गलियों का रूह -चुह : गया में यौनकर्म और यौनकर्मी : अंतिम क़िस्त
इतिहास का अंधकूप बनाम बंद गलियों का रूह-चुह : गया में यौनकर्म और यौनकर्मी : पहली क़िस्त
औरत : आजाद होने का अर्थ !
उन्हें लड़ना ही होगा अपने हिस्से के आसमान के लिए
स्त्री के विरूद्ध स्त्री कठघरे में ( !)
पश्चिम उत्तर प्रदेश : स्त्री की नियति
हरियाणा की मनीपुरी बहुएं
नाच एक संवेदनशील उपन्यास