रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
नीतीश जी,आपकी पुलिस बलात्कारी को बचा रही है.
मिर्चपुर के दलित आज भी कर रहे एक अदना सा घर का इन्तजार
कभी सूख नहीं पायेंगे रोहित वेमुला की माँ के आंसू
मैं भी हो सकती थी उस दिन यौन हमले की शिकार
यौन हमलावारों से सख्ती से निपटें पीड़िताएं, तभी रुकेंगी बैंगलोर जैसी घटनाएं
हिंसा में कोई मर्दानगी नहीं
जाति-वर्ग और लिंग के दायरे में चल रहे संघर्षों के साथ जुड़ें : कविता कृष्णन
देश के किसी नेता में न यह हैसियत है, न हिम्मत की वह तानाशाही लेकर आये: देवीप्रसाद त्रिपाठी
नाच एक संवेदनशील उपन्यास