नारे, प्रतिरोध और मज़ा-मज़ाक
आधुनिक भारत में महिलाओं की भूमिका : परिवर्तन, उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ
बाबू जगदेव प्रसाद की राजनीति: भाषा, प्रतीक और मुद्दे
शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल
शक्ति स्वरूपा नहीं मानवी समझने की जरूरत
पिछले पांच सालों में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े है: महाराष्ट्र महिला कांग्रेस अध्यक्ष
प्यार के परदे में कैद आज़ादी
अफसोस कि औरतें उठ तो रही हैं पर मर्दवादी संस्थाएं उन्हे कुचल देना चाहती हैं
कन्हैया कुमार सेक्सिस्ट और जातिवादी हैं (!)
‘मुख्यमंत्री, मंत्री और जो राष्ट्रपति हुए सबने किया यौन-शोषण, राजनीति में अस्मिता-हीन औरत की वेश्याओं से भी अधिक दुर्दशा’: रमणिका
स्त्री-छवियाँ बदली हैं लेकिन आदिवासी स्त्रियाँ आज भी अपने पुरखिन जैसी
राजनीति को महिलाओं ने बदला है फिर भी मतदाता उनके प्रति उदासीन
‘द सेकंड सोच’: कटी हुई जुबानों के बीच सच का परचम