रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
‘तिवाड़ी परिवार’ में जातिभेद और छुआछूत बचपन से देखा
ब्राह्मण होने का दंश: कथित पवित्रता की मकड़जाल
ऑर्गेज़्मिक पैरिटी की चैरिटी बनाम ‘योनि उद्धारक’ बाजार
मेट्रो-किराया-माफ़: मोवलिटी और सुरक्षा की ओर एक कदम
उस संस्थान में ब्राह्मणों की अहमियत थी
हां उनकी नजर में जाति-घृणा थी, वे मेरे दोस्त थे, सहेलियां थीं
केरल के सभी स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाना अनिवार्य:देश में पहली बार
सांस्थानिक हत्या की सनातन परम्परा: शंबूक से लेकर डा.पायल तक
नाच एक संवेदनशील उपन्यास