रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
दिशोम गुरु को नेमरा में यूं मिली अंतिम विदाई! नेमरा से लौटकर
हिंदी सिनेमा में बाबा साहेब अम्बेडकर की वैचारिकी
प्रधानमंत्री का ‘अधूरा सच’ व संवैधानिक इतिहास, संवैधानिकता और भारतीय संविधान
क्या हो रहा है महिलाओं का राजनीतिकरण!
प्रचलित बायनरी नैरेटिव से अलग दलित राजनीति : इतिहास और चुनावी वर्तमान
जगजीवनराम के बारे में कई भ्रांतियां तोड़ती है यह किताब
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता पर महिलाओं की आपत्तियां
महिलाओं के हित में है जाति गणना
नाच एक संवेदनशील उपन्यास