दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
गुजरात दंगों में साहब कौन थे और क्या कर रहे थे बताने वाली किताब अब हिन्दी में/अग्रिम बुकिंग शुरू
स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 25 (अगस्त-सितंबर, 2017)
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ऑब्जेक्ट से सब्जेक्ट बनने की जद्दोजहद
प्रत्यक्ष प्रमाण से आगे और सूक्ष्म संवेदना की कविताएं : अभी मैंने देखा
ये किताबें शर्तिया नुस्खा हैं लड़कों/ मर्दों के बदलने के
विष्णु जी, ब्राहमणवाद से हमारी लड़ाई जारी रहेगी !
स्त्री मुक्ति के प्रश्न
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना