रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
हां मुझे फर्क पड़ता है…
मनोसांकृतिक संरचना एवं हिंसा का अंतरसंबंध : हेजेमोनी और दलित स्त्री
कुछ अल्पविराम
इसलामपुर की शिक्षा-ज्योति कुन्ती देवी
भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू
स्त्रीकाल शोध जर्नल (32)
स्त्रीकाल का नया अंक ऑनलाइन पढ़ें या घर मँगवायें
अम्बेडकर की प्रासंगिकता के समकालीन बयान
नाच एक संवेदनशील उपन्यास