लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
नई धारा राइटर्स रेज़िडेंसी प्रकरण—नागरिक समिति की रिपोर्ट, साहित्यिक जगत की जवाबदेही पर उठे सवाल
समाज में 15 प्रतिशत लोग ही सभी क्षेत्रों में अपना एकाधिकार जमाये हुए हैं: जीतनराम मांझी
हां मुझे फर्क पड़ता है…
एको एको जिंदगी, खुल के जिवांगें
लेखक संगठन (प्रलेस) ने स्त्री अस्मिता पर मर्द दरोगा को दी तरजीह
ये भागी हुई लड़कियाॅं ..!
बोल्गा से गंगा, तुम्हारी क्षय हो के रचयिता ने दी समाज को नई उर्जा: प्रेम कुमार मणि
पटना में याद की गयीं रमणिका गुप्ता
सूखा नशा