आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
चाइल्ड केयर लीव बनाम मातृत्व की ठेकेदारी पर ठप्पा
पहले बाबरी , फिर दादरी , फिर हिन्दुत्व के नाम पर बहादुरी
लोकआस्था और श्रमण परम्परा की अदम्य जिजीविषा का आख्यान
पोवाडा : वीर रस की मराठी कविता ( दलित परंपरा )
पितृसत्ता पुरुषों का अमानवीयकरण करती है : कमला भसीन
औरत , विज्ञापन और बाजार
अपने ही पराभव का जश्न मनाती है स्त्रियाँ ! ( दुर्गा पूजा का पुनर्पाठ )
त्योहारों के बहुजन सन्दर्भ
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर