आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
यौन हिंसा और न्याय की मर्दवादी भाषा : तीसरी किस्त
धार्मिक औरतें या गुलाम औरतें ….!
यौन हिंसा और न्याय की मर्दवादी भाषा : दूसरी किस्त
मुसलमान भी नहीं पैदा करना चाहते बेटियां
यौन हिंसा और न्याय की मर्दवादी भाषा : पहली क़िस्त
उपभोक्तावादी आधुनिकता की आजादी के बीच स्त्री
पितृसत्ता से आगे जहाँ और भी है
स्त्री का समाज और समाज में स्त्री‘अकेली’
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर