गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
रक्षा मंत्रालय ने लिया संज्ञान: सेना के अफसर द्वारा एक लड़की को तेज़ाब फेकने की धमकी मामला
अपने बच्चों को दूर रखे मर्दानगी की पाठशाला से
मैला ढोने वाली महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री को ख़त
राजेंद्र यादव से मन्नू का प्रेम ठोस था: वे पत्नी और प्रेमिका दोनो रहीं
मैत्रेयी इतनी इर्ष्यालू थी कि वह नजर रखती थी कि राजेंद्र जी के पास कौन आ रहा है (?)
‘ग्लोबल बहुजन एवार्ड’से सम्मानित हुईं मनीषा बांगर
स्त्री कामुकता का उत्सव मानती फ़िल्म ‘मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ’
स्त्री विमर्श और ‘कठगुलाब’
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय