गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
जब मैंने स्त्रियों की माहवारी को पहली बार जाना
जेल में बंद छात्रा का पत्र : “हम भगत सिंह के वारिस हैं जो जेल ही नहीं फांसी से भी नहीं डरते”
मुबारक हो बिहारवासियों, मर गयी चंचल पासवान
मीरा को ब्राह्मण सिद्ध करने वालों के पुरखों ने कबीर को भी बनाया था ब्राह्मण
राष्ट्रवाद का सीमांतः हिन्दी साहित्य के इतिहास-लेखन में सहजोबाई और भक्तिकाल
स्त्रीकाल के ‘स्त्री सत्ता: यथार्थ या विभ्रम’ अंक में मीरा कुमार
युवती की आत्महत्या की रिपोर्टिंग कर रहे दलित पत्रकार को ही पुलिस ने किया गिरफ्तार
बहुजन चौपाल में हुई चर्चा: भारत का भगवाकरण और सामाजिक न्याय की चुनौतियां
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय