गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का : क़त्ल किए गए सपनों का एक झरोखा
स्त्री लेखन का स्त्रीवादी पाठ
बलात्कार को सिर्फ परिचर्चा का विषय नहीं बनायें
और मैं फूलनदेवी से जुड़ गई
मोदी जी, लहू का लगान आपकी लुटिया न डुबो दे !
कांशीराम से मायावती तक: दलित राजनीति और दलित स्त्री-प्रश्न
नैचुरल सेल्फी की मुहीम: सौन्दर्य बाजार को लड़कियों की चुनौती
‘दर्दजा‘: हव्वा को पता होता तो वह बेऔलाद रह जाती
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय