गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
यह चुप्पी खतरनाक है
विमर्श से परे: स्त्री और पुरुष-दूसरी किश्त
ऊप्स मूमेंट : स्त्री को देह बनाते कैमरे
विमर्श से परे: स्त्री और पुरुष-पहली किश्त
हम चार दशक पीछे चले गए हैं :
स्त्री विमर्श की पठनीय किताबें
जीना जिन्दगी को आत्मकथा के नजरिये से -अंतिम किश्त
‘सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान’
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय