गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
महिलाएं असुरक्षित, यहां भी और वहां भी
चाहे नरक में दीजो डार
सलाखें भीतर और बाहर
स्त्री आत्मकथा : आत्माभिव्यक्ति और मुक्ति प्रश्न
दिल्ली में नाइजीरियन यौन- दासियाँ
एक साक्षात्कार लंबाणी जनजाति की स्त्रियों से
आपहुदरी : रमणिका गुप्ता की आत्मकथा : आख़िरी किस्त
आपहुदरी : रमणिका गुप्ता की आत्मकथा : चौथी क़िस्त
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय