आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
औरत ’चुप‘ रहे, तभी ’महान‘ है
स्त्री के प्रेम की अभिव्यक्ति – ‘अन्या से अनन्या’
‘डार्क रूम में बंद आदमी’ की निगाह में औरत : आखिरी क़िस्त
‘डार्क रूम में बंद आदमी’ की निगाह में औरत : पहली क़िस्त
मजदूर-वर्ग के दृष्टिकोण से स्त्री-मुक्ति : १५-१६ नवम्बर,२०१४, गाँधी- आश्रम , सेवाग्राम, में दो दिन का कार्यशाला
धर्म की खोखली बुनियादों में दबी स्त्री
महज मुद्दा
बिहार के भागलपुर में बलात्कार की कोशिश : जेंडर और जाति के समुच्चय का घिनौना चेहरा
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर