गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
स्त्री लेखन का स्त्रीवादी पाठ
कांशीराम से मायावती तक: दलित राजनीति और दलित स्त्री-प्रश्न
सामंती हवेलियों में दफ्न होती स्त्री
मुस्लिम महिलाओं की निर्णय स्वतंत्रता: प्रतिरोध का एक स्वरूप
अस्तित्व के प्रश्न खड़े करती दलित स्त्री पात्र
स्त्री कामुकता का उत्सव मानती फ़िल्म ‘मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ’
स्त्री विमर्श और ‘कठगुलाब’
स्त्रीवाद और महादेवी की ‘श्रृंखला’ की कड़ियाँ’
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय