गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
निराला की कविता में स्त्री मुक्ति का स्वर
रीतिकाल में स्त्रीं-यौनिकता का सवाल उर्फ देह अपनी बाकी उनका
पुंसवादी आलोचना के खतरे और महादेवी वर्मा
हिन्दी पाठ्यपुस्तकों में स्त्री छवि
अरूणा शानबाग – आखिर कब तक???
स्त्री आत्मकथा – अस्मिता संघर्ष तथा आत्मनिर्भर स्त्री
समकालीन हिंदी आलोचना का स्त्री स्वर
उषा प्रियंवदा की कहानियों में स्त्री-अस्मिता का प्रश्न
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय