महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
प्रियंका सिंह की कवितायें
तुम आए हो ना शब -ए-इंतज़ार गुज़री है …….
झाड़ू
इस दुनिया से परे आख़िर है क्या
नगाड़े की तरह बजते है शब्द
स्त्री एवं भाषा : तीसरी परम्परा की खोज एवं वैकल्पिक भाषावैज्ञानिक अध्ययन
कविता विकास की कवितायेँ
विमर्श नहीं, विचारधारा : अस्मितावाद की जगह आंबेडकर-चिंतन
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध