शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल
‘द सेकंड सोच’: कटी हुई जुबानों के बीच सच का परचम
फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
पंखुरी सिन्हा की कवितायें
स्त्री-शक्ति की भूमिका से उठते कई सवाल
हर पुरुष अपनी चमड़ी के भीतर मर्द ही होता है
मीना खोंड की दो कवितायें
कर्मानंद आर्य की कवितायें : वसंत सेना और अन्य
सुनीता झाड़े की कवितायें : हम गुनाहगार औरतें और अन्य
यही फ़िज़ा थी, यही रुत, यही ज़माना था
स्त्री – संस्कृति का हरकारा : यू आर अनंतमूर्ती
पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल