महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
दलित आलोचना अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं करती : प्रोफ . मैनेजर पाण्डेय
चालीस साल की स्त्री : कवितायें और विमर्श
हाशिये का हर्फ या वर्चस्ववादी विमर्श !
अरुण देव की कवितायें
अशोक कुमार पाण्डेय की कवितायें
कंचन भारद्वाज की कवितायें
आशा पांडेय ओझा की कवितायें
एक क्रांतिकारी की पत्नी का आत्मकथ्य
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध