इमाम आयतुल्लाह ख़ामेनेई से नासिरा शर्मा का साक्षात्कार
महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
स्वर्णलता ठन्ना की कवितायें
संजय इंगले तिगांवकर की कवितायें
धीय बिनु धरम न होय….!
वीणा वत्सल सिंह की कवितायें : रेहाना जब्बारी और अन्य
नीलिमा सिन्हा की कवितायें : वर्किंग वीमेन और अन्य
अविनाश मिश्र की चार कवितायें : बदसूरत औरत की जरूरत और अन्य
महिलाएँ-जाति, वर्ग या एक उत्पीड़ित लिंग
दूजी मीरा : आख़िरी क़िस्त
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!