इमाम आयतुल्लाह ख़ामेनेई से नासिरा शर्मा का साक्षात्कार
महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
बदलते समय की कवितायें
अरुण चंद्र राय की कवितायें
सुजाता तेवतिया की कवितायें : अगर नहीं होती गुफा मैं और
मनुस्मृति दहन के आधार : डा आम्बेडकर
रवींद्र के दास की कवितायें : माँ ! पापा भी मर्द ही हैं न !
इला कुमार की कवितायें
मारे गये बच्चों की याद में हेम्ंत जोशी , राजेश जोशी और उदय प्रकाश की कवितायें पढ़ें
वसीम अकरम की कवितायें : आलू प्याज की बोरियां हैं लडकियां
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!