इमाम आयतुल्लाह ख़ामेनेई से नासिरा शर्मा का साक्षात्कार
महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
उषा प्रियंवदा की कहानियों में स्त्री-अस्मिता का प्रश्न
मौत तक जाने का रास्ता खुद बनाया पहले उसने
जाति, जेंडर और क्लास दलित स्त्रीवाद की धूरि
सुनो चारुशीला और अन्य कवितायें
बहन का प्रेमी: पांच कविताएं
दो पीढी तीन कवितायें
बिल्किस … तुम कहाॅं हो …. ?
स्वप्न समय : बीहड़ में उतरती भाषा
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!