वह राहुल गांधी से प्यार करती है, हथेलियों में रैक्व की आत्मा है
बागमती किनारे बढ़ती प्यास
“पेड़,पानी और प्रतिबद्धता : विजयपुरा की हरियाली की अद्भुत कहानी”
आस्था का सम्मान
जेंडर और जाति के कुंडलों को तोडता लेखन और सत्ता की कुर्सी
बदरूहें हवा में चिरागों की तरह उड़ रही हैं
पुंसवादी आलोचना के खतरे और महादेवी वर्मा
अरूणा शानबाग – आखिर कब तक???
हव्वा की बेटी : उपन्यास अंश, भाग 2
स्त्री आत्मकथा – अस्मिता संघर्ष तथा आत्मनिर्भर स्त्री
हव्वा की बेटी: उपन्यास अंश
समकालीन हिंदी आलोचना का स्त्री स्वर
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’