वह राहुल गांधी से प्यार करती है, हथेलियों में रैक्व की आत्मा है
बागमती किनारे बढ़ती प्यास
“पेड़,पानी और प्रतिबद्धता : विजयपुरा की हरियाली की अद्भुत कहानी”
आस्था का सम्मान
विद्रोह की मशाल है सावित्रीबाई फुले की कविताएं
प्रेमा झा की कविताएँ
निराला की कविता में स्त्री मुक्ति का स्वर
नीलम मैदीरत्ता ‘गुँचा’ की कविताएँ
मै ही हूँ मैला आंचल में डाक्टर ममता: लतिका
उमा झुनझुनवाला की कविताएं
सेक्सिज़्म भाषा के ढाँचे में नहीं, लेखक के अन्तर्मन में होता है: आख़िरी क़िस्त
धूमिल और स्त्री : अर्थात् वक़्त की चैकी पर बैठा अधेड़ मुंशी: पहली क़िस्त
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’