वह राहुल गांधी से प्यार करती है, हथेलियों में रैक्व की आत्मा है
बागमती किनारे बढ़ती प्यास
“पेड़,पानी और प्रतिबद्धता : विजयपुरा की हरियाली की अद्भुत कहानी”
आस्था का सम्मान
स्त्री का समाज और समाज में स्त्री‘अकेली’
‘मध्यरात्रि के बीच’ और अन्य कविताएं ( कवयित्री इला कुमार)
तो देख्यो है घूंघट पट खोल- मीराबाई : हिन्दी की पहली स्त्रीवादी : आख़िरी क़िस्त
कोठागोई : किस्सों का अपना चुनाव
‘तेरा कोई नहीं रोकणहारा, मगन होय मीरा चली’-मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी : तीसरी क़िस्त
माई मैं तो लियो है सांवरिया मोल’ — मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी : दूसरी क़िस्त
‘बरजी मैं काही की नाहिं रहूं’ — मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी : पहली क़िस्त
अकथनीय का कथन – एक औरत की नोटबुक
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’