नाच एक संवेदनशील उपन्यास
राहुल गांधी,कांग्रेस की परंपरा और INDIA गठबंधन का असहज भविष्य
भारतीय राजनीति के आधुनिक दधीचि हैं लालू प्रसाद!
ऑब्जेक्टिव प्रश्न से आत्मबोध तक : बाबासाहेब की खोज
पीड़ाजन्य अनुभव और डा आंबेडकर का स्त्रीवाद
औरतें – क़िस्त चौथी ( स्पैनिश कहानियां )
1990 के बाद का हिंदी समाज और अद्विज हिंदी लेखन
सुनंदा का दरवाजा
देखो-देखो ‘चमईया’ हमार सुतुही
औरतें – क़िस्त तीन ( स्पैनिश कहानियां )
नदिया के तीरे-तीरे
“चकरघिन्नी” : तीन तलाक़ का दु:स्वप्न
कवि कभी मरता नहीं, वह अपनी रचनाओं में जीवित रहता है