महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
मुन्नी गुप्ता की कविताएं ( प्रेतछाया और रोटी का सवाल व अन्य)
तीस घटा पाँच बराबर आज़ाद और मुकद्दस औरत (पतनशील पत्नियों के नोट्स से)
सत्यप्रकाश की कविताएं (शब्द व अन्य)
सिर्फ चीत्कार और उच्छ्वास ही लेखन नहीं है: ममता कालिया
राकेश श्रीमाल की कविताएँ
घेराबंदी (अरविंद जैन की कहानी)
‘यौन हिंसा के सन्दर्भ में लज्जित करने की रणनीति’ (यशपाल के झूठा-सच में)
साहित्य के मजदूर का जाना: याद किये गये मजीद अहमद
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध