नाच एक संवेदनशील उपन्यास
राहुल गांधी,कांग्रेस की परंपरा और INDIA गठबंधन का असहज भविष्य
भारतीय राजनीति के आधुनिक दधीचि हैं लालू प्रसाद!
ऑब्जेक्टिव प्रश्न से आत्मबोध तक : बाबासाहेब की खोज
मेरी माँ मेरा आदर्श..!
वर्जिन : जयप्रकाश कर्दम की कहानी (पहली क़िस्त)
वेश्यालय में किस्म-किस्म के लोग आते हैं: विदुषी पतिता की आत्मकथा
स्त्री यौनिकता से भयभीत हिन्दी आलोचना और ‘उर्वशी’
उनकी प्रतिबद्धता हाशिये के लोगों के साथ ताउम्र रही
एक विदुषी पतिता की आत्मकथा: दूसरी क़िस्त
वह आत्मीय और दृष्टिसंपन्न संपादक हमें अलविदा कह गयी
महादेवी-काव्य-संध्या का आयोजन:महादेवी वर्मा के गीतों का गायन और समकालीनों का काव्यपाठ
कवि कभी मरता नहीं, वह अपनी रचनाओं में जीवित रहता है