वह राहुल गांधी से प्यार करती है, हथेलियों में रैक्व की आत्मा है
बागमती किनारे बढ़ती प्यास
“पेड़,पानी और प्रतिबद्धता : विजयपुरा की हरियाली की अद्भुत कहानी”
आस्था का सम्मान
दुनिया के मजदूर-मजदूरनें एक हों…
बच्चों को रोटी, कपड़ा, दवा और पढाई नहीं दे पाने वाला समाज सिर्फ सजा देने के लिए उतावला है
इंसाफ अधूरा है
जुंको फुरुता: जिसे याद रखना ही होगा
मगध में छठ : स्त्रीवादी पाठ
पहले बाबरी , फिर दादरी , फिर हिन्दुत्व के नाम पर बहादुरी
“मोर्चे पर कवि” / राजा रोज कुरते बदलता है/लेकिन राजा नंगा है
लोकआस्था और श्रमण परम्परा की अदम्य जिजीविषा का आख्यान
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’