आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
जहां ईश्वर है और अन्य कविताएं (वीरू सोनकर)
स्त्रीवाद की ` रिले रेस `में रमणिका गुप्ता का बेटन
स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 27-28 ( दिसम्बर मार्च )
दुश्मनी से परे जन की बात: पाकिस्तानी जनांदोलन की किताब
महिलाओं को संसद में होना ही चाहिए : वेंकैया नायडू
“आम औरत की दैहिक या मानसिक यातना के लिए दहकते सवाल“
स्त्रीकाल (अक्टूबर-दिसंबर) पढ़ें नॉटनल पर
स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 26 (अक्टूबर -नवंबर, 2017)
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर