ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध
हिंदी सिनेमा में बाबा साहेब अम्बेडकर की वैचारिकी
हिंदी रंगमंच में महिला रंगकर्मियों का योगदान
प्रश्नचिह्न
चमकीला का स्याह समाज
कमला: मौत एक क्रमिक आत्म(हत्या)
मदर इंडिया: एक संघर्षरत भारतीय स्त्री की अमर कथा
द केरला स्टोरी – क्या वाकई 10 साल के बाद केरल एक मुस्लिम स्टेट हो जाएगा?
पश्चिम बनाम पूरब, यूरोप बनाम भारत, अंग्रेज़ी बनाम हिंदी, राजनीति बनाम संस्कृति, वर्ग बनाम अस्मिता – नए विमर्शों का समायोजन
स्त्री सुन्दरता के नये पैमाने : आत्ममुग्धता से आत्मकुंठा तक