गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’
स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धुरंधर” के लड़ाके
समाज, संस्कृति और पितृसत्ता से ‘जूली’ का संघर्ष
“स्पंदन सम्मान, 2025” फ़िल्म और रंगमंच में अभिनय के लिए विभा रानी को मिलेगा ‘ललित कला सम्मान’
क्यों विवादों में है बिहार सरकार का राजभाषा पुरस्कार
एक संभावना का अंत : अलविदा इति !
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय