गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
बाबू जगदेव प्रसाद की राजनीति: भाषा, प्रतीक और मुद्दे
फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय