भारतीय राजनीति के आधुनिक दधीचि हैं लालू प्रसाद!
ऑब्जेक्टिव प्रश्न से आत्मबोध तक : बाबासाहेब की खोज
कवि कभी मरता नहीं, वह अपनी रचनाओं में जीवित रहता है
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री’
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
शिवनंदन पासवान को क्यों भुला दिया गया : जननायक कर्पूरी ठाकुर को दिया था ‘मरणोपरांत न्याय’ !
समाज, संस्कृति और पितृसत्ता से ‘जूली’ का संघर्ष
जगजीवन राम और उनका नेतृत्व पुस्तक सामाजिक संस्कारों में विन्यस्त करने को प्रेरित करती है
रांची में अगस्त की वो रातें जब लोगों के सिर पर सवार था खून… HEC में बन रहे थे चाकू, खंजर और भाला..
भारतीय महिलाओं के अधिकार: अतीत से वर्तमान तक की यात्रा
सत्यजीत राय के वाजिद अली शाह
क्या एक मिथ (फातिमा शेख) के बरक्स सच कहना साम्प्रदायिकता है ?
सीवान की संस्कृति एवं कला