मुखपृष्ठ
स्त्रीवाद
पितृसत्ता
शोध आलेख
सैद्धांतिकी
दलितस्त्रीवाद
हासिल
वीडियो
वीडियो
स्त्रीकाल लाइव
क़ानून
प्रकाशन
प्रिंट त्रैमासिक
ऑनलाइन शोध जर्नल
किताबें
खबरें
बड़ी ख़बरें
राजनीतिक
आर्थिक
कैम्पस
सांस्कृतिक
इतिहास
कला-संस्कृति
समसामयिक
साहित्य
स्वास्थ्य
राजनीति
इंटर्नशिप
डोनेशन
Search
हमारे बारे में
सम्पादक मंडल
डोनेशन
इंटर्नशिप
Facebook
Twitter
Youtube
मुखपृष्ठ
स्त्रीवाद
पितृसत्ता
शोध आलेख
सैद्धांतिकी
दलितस्त्रीवाद
हासिल
वीडियो
वीडियो
स्त्रीकाल लाइव
क़ानून
प्रकाशन
प्रिंट त्रैमासिक
ऑनलाइन शोध जर्नल
किताबें
खबरें
बड़ी ख़बरें
राजनीतिक
आर्थिक
कैम्पस
सांस्कृतिक
इतिहास
कला-संस्कृति
समसामयिक
साहित्य
स्वास्थ्य
राजनीति
इंटर्नशिप
डोनेशन
Search
मुखपृष्ठ
स्त्रीवाद
पितृसत्ता
शोध आलेख
सैद्धांतिकी
दलितस्त्रीवाद
हासिल
वीडियो
वीडियो
स्त्रीकाल लाइव
क़ानून
प्रकाशन
प्रिंट त्रैमासिक
ऑनलाइन शोध जर्नल
किताबें
खबरें
बड़ी ख़बरें
राजनीतिक
आर्थिक
कैम्पस
सांस्कृतिक
इतिहास
कला-संस्कृति
समसामयिक
साहित्य
स्वास्थ्य
राजनीति
इंटर्नशिप
डोनेशन
Search
Home
Authors
Posts by रक्षा गीता
रक्षा गीता
16 POSTS
1 COMMENTS
साहित्य अध्येता व सिनेमा विशेषज्ञ रक्षा गीता स्त्रीकाल के संपादन मंडल की सदस्य हैं।
कला-संस्कृति
कोबाल्ट ब्लू: फ़िल्म समीक्षा
रक्षा गीता
-
June 27, 2025
साहित्य
संबंधों के सैलाब की त्रासदी: कहानी संग्रह ‘एक और सैलाब’ मेहरुन्निसा परवेज़ (2)
रक्षा गीता
-
June 15, 2025
पितृसत्ता
संबंधों के सैलाब की त्रासदी: कहानी संग्रह ‘एक और सैलाब’ मेहरुन्निसा परवेज़
रक्षा गीता
-
June 13, 2025
इतिहास
सत्यजीत राय के वाजिद अली शाह
रक्षा गीता
-
May 2, 2025
समसामयिक
एक खुली क़िताब जिसे पढ़ना बाकी है
रक्षा गीता
-
October 10, 2024
समसामयिक
उम्मीदों के आतिशदाने
रक्षा गीता
-
July 4, 2024
सिनेमा
चमकीला का स्याह समाज
रक्षा गीता
-
June 7, 2024
पितृसत्ता
कमला: मौत एक क्रमिक आत्म(हत्या)
रक्षा गीता
-
May 30, 2024
1
2
Page 2 of 2
Stay Connected
0
Fans
Like
0
Followers
Follow
22,800
Subscribers
Subscribe
- Advertisement -
Latest Articles
इतिहास
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
कला-संस्कृति
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
कैम्पस
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
किताबें
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
इतिहास
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना
Load more