पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
समलैंगिक और थर्ड जेंडर: सहानुभूति के साथ स्वीकृति की जरूरत
क्यों मारी जा रही हैं दलित महिलायें
माहवारी पर बात की झिझक हुई ख़त्म
उम्मीदों के उन्मुक्ताकाश की क्वीन
मनुस्मृतिः जेंडर हिंसा का कानूनी ग्रंथ
हिन्दी साहित्य में महिलाओं को अब तक समानता नहीं मिली है : उषा किरण खान
दलित स्त्रियाँ खुद लिखेंगी अपना इतिहास
स्वयं में असाधारण स्त्री : माया एंजलो
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब