दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
भारतीय पुलिस-तंत्र में महिलाओं की स्थिति: ‘गुनाह-बेगुनाह’ उपन्यास के विशेष सन्दर्भ में- केएम प्रतिभा
महिलाओं और अन्य आदिवसियों पर मणिपुर में हिंसा के खिलाफ स्त्रीवादियों का प्रस्ताव
मदर इंडिया: एक संघर्षरत भारतीय स्त्री की अमर कथा
मणिपुर में बलात्कार एक सुनियोजित नरसंहार का हिस्सा है।
परिवारो में असमानता
पेड पीरियड लीव के लिए अभियान गीत हुआ रिलीज
टूट रही हैं वर्जनाएं: अनेक रिश्तों में होना आखिरी टैबू
पश्चिम बनाम पूरब, यूरोप बनाम भारत, अंग्रेज़ी बनाम हिंदी, राजनीति बनाम संस्कृति, वर्ग बनाम अस्मिता – नए विमर्शों का समायोजन
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना