आस्था का सम्मान
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’
स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
तुम मेरे साथ रहो मेंरे कातिल मेरे दिलदार
नाम जोती था मगर वे ज्वालामुखी थे
विमर्श की ज़रुरत कहाँ
है मुझको जमशेद तेरे जाम से भी काम…..!!
शास्त्रीय सुरों की मल्लिका जिन्हें जनता ने ‘गानसरस्वती ‘ नाम दिया
स्त्री-पुरुष अलग-अलग प्रांत नहीं
‘अनारकली आॅफ आरा’ : आंसुओं से उपजी आग और भरोसे की उम्मीद
सॉफ्ट पोर्न नहीं: ये मध्यवर्गीय स्त्री की कामनाओं के नोट्स हैं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार