पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
अभी तो बहुत कुछ शेष था ! (रजनी तिलक का असमय जाना)
पितृसत्ता का छल और जे.एन.यू. छात्राएं
महिला पत्रकारों पर बढ़ रहे हमले, जेएनयू प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस की बदसुलूकी
पेशेवर महिलाएं : बदलती पीढ़ी की अभिव्यक्ति
स्त्रीवाद की ` रिले रेस `में रमणिका गुप्ता का बेटन
हमें अपना आसमान खुद नापना होगा
पेरियार: महिलाओं की आजादी का पक्षधर मसीहा
कॉ. कुंती देवी : जन-संघर्ष का पर्यायवाची नाम
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब