स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
पहली ट्रांसजेंडर स्टूडेंट (पंजाब विश्वविद्यालय) के संघर्ष की कहानी
लेनिन: कम्युनिस्ट नेतृत्व महिलाओं के आन्दोलन के सवाल पर निराशावादी, रुको और देखो वाला रुख अपना लेता है
इजाडोरा डंकन: नृत्य की महान साम्राज्ञी और स्त्री-स्वतंत्रता की प्रवक्ता!
मुश्किल डगर को आसान बनाया दलित महिला उद्यमी कृष्णा कुमारी ने
आदिवासी युवती की हत्या को आत्महत्या करार देने की पुलिसिया साजिश (सामूहिक बलात्कार की भी आशंका)
अध्यादेश: बचपन से बलात्कार की सज़ा उम्र कैद या फाँसी!
बलात्कार और हत्या का न्यायशास्त्र-समाजशास्त्र !
बेटियों का नाम अनचाही, फालतू…. (बदलाव के दौर में रूढ़िवादी मानसिकता की शिकार होती बेटियाँ)!
‘गूज बम्प्स’