स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
मजदूर-वर्ग के दृष्टिकोण से स्त्री-मुक्ति : १५-१६ नवम्बर,२०१४, गाँधी- आश्रम , सेवाग्राम, में दो दिन का कार्यशाला
धर्म की खोखली बुनियादों में दबी स्त्री
महज मुद्दा
बिहार के भागलपुर में बलात्कार की कोशिश : जेंडर और जाति के समुच्चय का घिनौना चेहरा
शिक्षा में जातिगत और लिंगगत असमानता
महिलाएँ-जाति, वर्ग या एक उत्पीड़ित लिंग
रक्त शुद्धता, स्त्री दासता और लव जेहाद
जेंडर की अवधारणा और अन्या से अनन्या
‘गूज बम्प्स’