लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
कश्मीर के आईने में शेष भारत का विकास और मर्दवादी चेहरा
वैवाहिक बलात्कार और हिंसा: एक अध्ययन
लेखिका ने गिनाये प्रगतिशील लेखक संघ के महिला विरोधी निर्णय: संघ सेक्सिस्ट पुलिसवाले के आगे नतमस्क
लेखक संगठन (प्रलेस) ने स्त्री अस्मिता पर मर्द दरोगा को दी तरजीह
मिसोजिनी, नायकत्व और ‘कबीर सिंह’
हां उनकी नजर में जाति-घृणा थी, वे मेरे दोस्त थे, सहेलियां थीं
बिहार की सावित्रीबाई फुले कुन्ती देवी की कहानी
सांस्थानिक हत्या की सनातन परम्परा: शंबूक से लेकर डा.पायल तक
सूखा नशा