लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
बलात्कृत रंगकर्मियों को पुलिस ने कैद कर रखा है: फैक्ट फाइंडिंग टीम
आदिवासी गरीब स्त्रियों का ‘शिकार’ करके भी जनवादी कहलाने वाले कलाकार की आत्मकथा (!)
महिलाओं के गाड़ी चलाने से सऊदी अरब का कस्टोडियन लॉ संकट में
किसी एक ब्राह्मण से अम्बेडकर, बुद्ध, रैदास की ताकत वाला दलित आन्दोलन खत्म नहीं हो सकता: रमणिका गुप्ता
रंगकर्मियों से बलात्कार : क्या बलात्कारी पीड़िता को खुद सही-सलामत वापस छोड़ते हैं? आदिवासी अधिकार की प्रवक्ता दयामनी बारला ने उठाये ऐसे कई सवाल
पत्थलगड़ी के खिलाफ बलात्कार की सरकारी-संघी रणनीति (!)
आत्मकथा नहीं चयनित छविनिर्माण कथा (!)
महिला शोधार्थियों की प्रताड़ना: विश्वविद्यालय नहीं कलह का केंद्र, पुलिस पर भी सवाल
सूखा नशा